नई दिल्ली। भारत और बेल्जियम के बीच संबंध अब पारंपरिक व्यापार और हीरा कारोबार से आगे बढ़कर रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार की ओर बढ़ रहे हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की 2 से 4 सितंबर तक प्रस्तावित भारत यात्रा को इसी बदलते रिश्ते के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री डी वेवर 3 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश, रक्षा-सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा वह भारतीय उद्योग परिसंघ के एक कारोबारी कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे।
रक्षा सहयोग पर रहेगा विशेष जोर
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन का भारत दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। मार्च 2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रैंकेन के बीच हुई बातचीत में भारत-प्रशांत क्षेत्र, समुद्री सुरक्षा और रक्षा औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।
भारत के लिए बेल्जियम के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करना यूरोपीय देशों के साथ रक्षा तकनीक, विनिर्माण और औद्योगिक साझेदारी बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। वहीं, बेल्जियम की समुद्री और लॉजिस्टिक्स क्षमता भारत के साथ सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकती है।
हीरा कारोबार से आगे बढ़ेगी आर्थिक साझेदारी
भारत-बेल्जियम व्यापार में लंबे समय से हीरा और कीमती पत्थरों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। बेल्जियम का एंटवर्प वैश्विक हीरा कारोबार के प्रमुख केंद्रों में शामिल है, जबकि भारत दुनिया के प्रमुख हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्रों में से एक है।
अब दोनों देश इस पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर फार्मास्यूटिकल्स, लाइफ साइंसेज, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल तकनीक, ग्रीन टेक्नोलॉजी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
भारत-EU FTA के बाद बढ़ेंगे अवसर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत पूरी होने के बाद बेल्जियम के साथ आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और बेल्जियम की यूरोप के केंद्र में स्थिति उसे भारत के लिए विशेष महत्व देती है।
एंटवर्प के साथ-साथ बेल्जियम के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क यूरोपीय बाजार तक पहुंच के लिहाज से भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध भारत-यूरोप व्यापारिक संपर्क को भी विस्तार दे सकते हैं।
तकनीक और ग्रीन एनर्जी में साझेदारी
भारत और बेल्जियम के बीच हरित हाइड्रोजन, नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, परमाणु चिकित्सा, फार्मास्यूटिकल्स तथा अनुसंधान एवं विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
भारत जहां सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण में अपनी घरेलू क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं बेल्जियम की तकनीकी और औद्योगिक विशेषज्ञता दोनों देशों के लिए साझेदारी के नए रास्ते खोल सकती है।
हिंद-प्रशांत और समुद्री सुरक्षा भी एजेंडे में
बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हो गई हैं। भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहा है, जबकि बेल्जियम यूरोप के प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में सुरक्षित वैश्विक व्यापार मार्गों में रुचि रखता है।
ऐसे में भारत-बेल्जियम सहयोग का दायरा द्विपक्षीय संबंधों से आगे बढ़कर भारत-यूरोप रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत कर सकता है।








