नई दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अपने 10 साल के सफर में भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है। शहरों से लेकर गांवों तक मोबाइल के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान की सुविधा ने लोगों के लेनदेन के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। आज UPI केवल भारत में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता की पहचान बन चुका है।
2016 में 21 बैंकों से हुई थी शुरुआत
UPI की शुरुआत वर्ष 2016 में 21 बैंकों के साथ हुई थी। इसका संचालन और प्रबंधन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के तहत होता है। समय के साथ इसका नेटवर्क लगातार बढ़ता गया और अब 700 से अधिक बैंक एवं वित्तीय संस्थान इससे जुड़ चुके हैं।
रोजाना करोड़ों डिजिटल लेनदेन
UPI के जरिए रोजाना औसतन 66 करोड़ से अधिक लेनदेन किए जा रहे हैं। रियल-टाइम पेमेंट के क्षेत्र में भारत दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत में हुए रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का हिस्सा वैश्विक लेनदेन में करीब आधा है।
ब्राजील का Pix, चीन के Alipay और WeChat Pay, अमेरिका के Visa, Mastercard और ACH, ब्रिटेन के Faster Payments तथा सिंगापुर के PayNow को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में UPI के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समकक्षों में गिना जाता है।
QR कोड से सेकंडों में भुगतान
UPI की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता है। ग्राहक QR कोड स्कैन कर भुगतानकर्ता की UPI आईडी से जुड़ जाता है। इसके बाद भुगतान एप्लिकेशन संबंधित बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता के नेटवर्क के जरिए लेनदेन पूरा करता है।
बैंक भुगतान को प्रमाणित करने के बाद खाते से राशि डेबिट करता है और लाभार्थी के बैंक खाते में रकम पहुंच जाती है। पूरी प्रक्रिया आमतौर पर कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाती है।
बैंक डिटेल याद रखने की जरूरत नहीं
UPI ने भुगतान को इतना आसान बना दिया है कि ग्राहक को हर बार बैंक खाता नंबर या IFSC कोड दर्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती। QR कोड स्कैन करने, राशि दर्ज करने और भुगतान की पुष्टि करने से लेनदेन पूरा हो जाता है।
यूपीआई की इसी सरलता, तेज गति और इंटरऑपरेबिलिटी ने इसे देश के आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक के लिए उपयोगी बना दिया है।
भारत बना डिजिटल पेमेंट टेक्नोलॉजी का बड़ा केंद्र
UPI की सफलता ने भारत की भूमिका को केवल डिजिटल भुगतान तकनीक के उपयोगकर्ता से आगे बढ़ाकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख उदाहरण के रूप में स्थापित किया है। दुनिया के कई देशों में भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को लेकर रुचि बढ़ी है।
UPI के दस साल का सफर इस बात का उदाहरण है कि किस तरह तकनीक, बैंकिंग नेटवर्क और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के तालमेल से करोड़ों लोगों के रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन को आसान बनाया जा सकता है।









