परमाणु ऊर्जा विस्तार के बीच भारत ने बढ़ाया ईंधन सुरक्षा का दायरा, विविध आपूर्ति नेटवर्क बनाने पर जोर
नई दिल्ली। भारत ने अपनी बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए यूरेनियम की दीर्घकालिक और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में हुई वार्ता के दौरान दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति और खनन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच खनन से संबंधित समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। इसके तहत यूरेनियम की आपूर्ति के साथ-साथ महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की योजना है। भारत का उद्देश्य परमाणु ईंधन के लिए किसी एक देश पर निर्भरता कम करते हुए अलग-अलग देशों से आपूर्ति का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।

परमाणु ऊर्जा विस्तार के लिए जरूरी होगा अधिक ईंधन
भारत आने वाले वर्षों में परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। ऐसे में परमाणु रिएक्टरों के लिए आवश्यक यूरेनियम की पर्याप्त और निरंतर उपलब्धता ऊर्जा सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई है।

भारत वर्तमान में कजाकिस्तान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के साथ परमाणु ईंधन और नागरिक परमाणु सहयोग से जुड़े समझौते कर चुका है। उज्बेकिस्तान का जुड़ना इस आपूर्ति व्यवस्था को और विविध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खनन और महत्वपूर्ण खनिजों पर भी सहयोग
भारत और उज्बेकिस्तान ने केवल यूरेनियम आपूर्ति तक सहयोग सीमित रखने के बजाय भूविज्ञान, खनन, खनिज प्रसंस्करण और महत्वपूर्ण खनिजों की वैल्यू चेन विकसित करने पर भी जोर दिया है। दोनों पक्षों ने संभावित खनिज भंडारों के विकास में एक-दूसरे की कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की इच्छा जताई है।

इसके साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी, ऊर्जा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और भविष्य की निवेश परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
मध्य एशिया से बढ़ेगा परमाणु ईंधन का विकल्प
उज्बेकिस्तान यूरेनियम उत्पादन करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। भारत के लिए मध्य एशिया से यूरेनियम का एक अतिरिक्त स्रोत मिलने से उसकी परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को भौगोलिक रूप से और मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

यूरेनियम बाजार पर वैश्विक परिस्थितियों, परिवहन, खनन में व्यवधान और कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कई देशों से आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कजाकिस्तान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से भी सहयोग
भारत ने पिछले वर्षों में कई यूरेनियम उत्पादक देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं। कजाकिस्तान भारत के महत्वपूर्ण यूरेनियम आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। वहीं, कनाडा की कंपनी कैमेको के साथ दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता भी हुआ है।

ऑस्ट्रेलिया के साथ नागरिक परमाणु सहयोग के तहत यूरेनियम के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए निर्यात का रास्ता भी आगे बढ़ा है। इसके अलावा रूस और अर्जेंटीना समेत अन्य देशों के साथ भी भारत के नागरिक परमाणु सहयोग संबंध हैं।
2047 तक परमाणु क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य
भारत ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को बड़े स्तर पर बढ़ाने का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा है। इसके लिए स्वदेशी 700 मेगावाट क्षमता वाले प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर (PHWR), बड़े आयातित रिएक्टर और भविष्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) जैसे विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है।

ऐसे में नए रिएक्टरों के निर्माण के साथ-साथ उनके लिए आवश्यक परमाणु ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
SMR से परमाणु क्षेत्र में नए अवसर
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव के अनुसार, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है। पारंपरिक परमाणु संयंत्रों की तुलना में SMR को कम पूंजी और अपेक्षाकृत कम समय में स्थापित करने की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने उज्बेकिस्तान के साथ हुए समझौते को भारत की यूरेनियम आपूर्ति को विविध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक कदम
भारत का उज्बेकिस्तान के साथ यूरेनियम सहयोग केवल एक नए आपूर्तिकर्ता को जोड़ने तक सीमित नहीं है। इसे आने वाले दशकों में परमाणु ऊर्जा के विस्तार के लिए दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा और विविध आपूर्ति नेटवर्क तैयार करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भारत जैसे तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरत वाले देश के लिए परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ और स्थिर ऊर्जा स्रोत के रूप में विस्तार देने के साथ-साथ यूरेनियम की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना भी बड़ी प्राथमिकता बन गया है।








