दिल्ली हाईकोर्ट बोला— प्रदर्शन के नाम पर शहर को बंधक नहीं बनाया जा सकता, केंद्र से मांगा जवाब
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़ा सवाल पूछा है। अदालत ने कहा कि जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले प्रदर्शनों से आम जनता को भारी परेशानी होती है और ऐसे में सरकार को इस स्थान को विरोध प्रदर्शन के लिए बंद करने पर विचार करना चाहिए।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ ने ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति संबंधी आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
‘प्रदर्शन के नाम पर शहर को बंधक नहीं बना सकते’
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा से पूछा कि सरकार जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि मध्य दिल्ली में लगातार होने वाले प्रदर्शनों से यातायात और आम जनजीवन प्रभावित होता है तथा शहर को बेवजह बंधक नहीं बनाया जा सकता।
याचिकाकर्ता ने पुलिस पर निर्णय टालने का लगाया आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने अदालत को बताया कि संगठन ने जुलाई में प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन दिया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने अब तक न तो अनुमति दी है और न ही आवेदन खारिज किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोगों के शामिल होने की बात कही गई थी, फिर भी आवेदन लंबित रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है मामला
एएसजी चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर को स्थायी विरोध प्रदर्शन स्थल बनाए जाने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। इस पर न्यायमूर्ति महाजन ने कहा कि उनके विचार में शहर के बीचों-बीच इस प्रकार के प्रदर्शन उचित नहीं हैं।
शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, लेकिन संतुलन भी जरूरी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को संवैधानिक अधिकार माना है। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके नाम पर आम जनता को असुविधा पहुंचाना या शहर की व्यवस्था बाधित करना उचित नहीं माना जा सकता।
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अदालत ने संबंधित पक्षों से आवश्यक जवाब मांगे हैं।







