Home उत्तराखण्ड प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी

प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी

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चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर के महाविद्यालय में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यू-सैक) के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में बोलते हुए पर्यावरण विद पदमविभूषण चंडी प्रसाद भट्ट ने प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण किये जाने पर जोर दिया। कहा कि आज प्राकृतिक जल स्रोत सुखते जा रहे है जो गंभीर चिंता का विषय है।
 महाविद्यालय गोपेश्वर में आयोजित कार्यशाला में बोलते हुए भट्ट ने कहा कि हमारे जल स्रोत दिन प्रतिदिन विलुप्त होते जा रहे है। जिसका मुख्य कारण अवैज्ञानिक तरीके से वनों का दोहन भी अहम है। कहा कि जमीन में नमी के अभाव व पेडों के न होने से जलस्रोत सुखते जा रहे है। उन्होंने आम जन से इस ओर ध्यान देने की अपील की। यू सैक के निदेशक एमपीएस बिष्ट ने बताया कि यूसैक राज्य के विभिन्न जलस्रोतो के अंतरिक्ष तकनीकी के माध्यम से अध्ययन कर आंकडे एकत्र कर रहा है। इसी क्रम में यह कार्यशाला आयोजित की गई है

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