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भारत-न्यूजीलैंड रक्षा सहयोग को नई धार, हिंद-प्रशांत में समुद्री साझेदारी मजबूत करने पर जोर

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नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला, समावेशी और नियमों पर आधारित बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को किसी नए सैन्य गठबंधन के बजाय व्यावहारिक क्षमताओं, समुद्री सुरक्षा और आपसी समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दूसरी रक्षा रणनीतिक वार्ता में समुद्री सुरक्षा पर जोर

24 अगस्त को वेलिंगटन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरी रक्षा रणनीतिक वार्ता आयोजित हुई। भारत की ओर से रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और न्यूजीलैंड की ओर से रक्षा मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी रिचर्ड श्मिट ने वार्ता की सह-अध्यक्षता की।

बैठक में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, सैन्यकर्मियों के आदान-प्रदान और व्यापक रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी रोडमैप 2030 के लक्ष्यों को जमीन पर लागू करने पर भी जोर दिया।

तीनों सेनाओं के बीच बढ़ेगा तालमेल

वार्ता के दौरान संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यासों, क्रॉस-सर्विस पर्सनल एक्सचेंज और डिफेंस स्टाफ कॉलेजों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर विचार किया गया। इसमें समुद्री, हवाई और थल सेनाओं के स्तर पर सहयोग को मजबूत करने की संभावनाएं शामिल हैं।

दोनों देशों का मानना है कि नियमित सैन्य प्रशिक्षण और अधिकारियों के आदान-प्रदान से एक-दूसरे की संचालन प्रक्रियाओं, संचार व्यवस्था और निर्णय लेने की प्रणाली को समझने में मदद मिलेगी। इससे भविष्य में मानवीय सहायता, आपदा राहत और समुद्री आपात स्थितियों में संयुक्त कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

समुद्री सहयोग पर विशेष फोकस

भारत और न्यूजीलैंड दोनों ही समुद्री राष्ट्र हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्गों को अपनी आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। भारत के लिए हिंद महासागर व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का प्रमुख आधार है, जबकि न्यूजीलैंड के लिए व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता आर्थिक और रणनीतिक हितों से जुड़ी है।

दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, हाइड्रोग्राफी और लॉजिस्टिक्स सहयोग जैसे क्षेत्रों में पहले ही कई कदम उठाए हैं। इसके अलावा, समुद्री सुरक्षा वार्ता और द्विपक्षीय नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

अवैध मछली पकड़ने से निपटने पर भी सहयोग

भारत की इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के समुद्री सुरक्षा स्तंभ में न्यूजीलैंड की भागीदारी से दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा और बढ़ा है। दोनों पक्षों ने अवैध, बिना रिपोर्ट और बिना नियमन वाली मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों से निपटने को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र माना है।

यह सहयोग समुद्री संसाधनों की सुरक्षा के साथ-साथ तटीय समुदायों की आजीविका और क्षेत्रीय समुद्री शासन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं

बैठक में संयुक्त पूंजी खरीद, परिचालन समन्वय और भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को नियमित उच्चस्तरीय संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारत के लिए न्यूजीलैंड के साथ रक्षा संबंधों का विस्तार हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसके रणनीतिक साझेदारों के नेटवर्क को मजबूत करता है। वहीं न्यूजीलैंड के लिए भारत के साथ बढ़ता सहयोग हिंद महासागर और व्यापक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक समझ तथा पहुंच को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

गठबंधन नहीं, व्यावहारिक साझेदारी पर जोर

भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन की दिशा में कदम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। दोनों देश अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखते हुए इंटरऑपरेबिलिटी, सूचना साझा करने, प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण पर ध्यान दे रहे हैं।

पिछले कुछ समय में दोनों देशों के रक्षा संबंधों में तेजी आई है। मार्च 2025 में रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन, अगस्त 2025 में पहली रक्षा रणनीतिक वार्ता और इसके बाद रणनीतिक साझेदारी तथा नए समुद्री सहयोग समझौतों ने दोनों देशों के रिश्तों को संस्थागत रूप देने की दिशा में आधार तैयार किया है।

हिंद-प्रशांत में साझा रणनीतिक हित

भारत और न्यूजीलैंड ने नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को साझा प्राथमिकता बताया है। दोनों देशों का सहयोग आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपदा राहत और रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में और विस्तार ले सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, न्यूजीलैंड के साथ मजबूत होते संबंध भारत को दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र तक अपनी रणनीतिक और समुद्री पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। वहीं दोनों देशों के बीच तकनीकी और रक्षा औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं भी भविष्य में नए अवसर खोल सकती हैं।

कुल मिलाकर, भारत-न्यूजीलैंड रक्षा साझेदारी अब सीमित सैन्य संपर्क से आगे बढ़कर एक अधिक नियमित और संस्थागत सहयोग का रूप ले रही है, जिसमें हिंद-प्रशांत की स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को प्रमुख आधार बनाया गया है।

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