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मालदीव में भारत की विकास साझेदारी का दिखा असर, थिलामाले ब्रिज का मुख्य ढांचा तैयार

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नई दिल्ली। भारत और मालदीव के बीच विकास साझेदारी को नई मजबूती देते हुए ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (GMCP) ने महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है। माले-विलीमाले हिस्से के पुल के ऊपरी ढांचे का अंतिम हिस्सा अपनी जगह स्थापित कर दिया गया है। इससे परियोजना का प्रमुख निर्माण चरण पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ गया है।

6.74 किलोमीटर लंबा है कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट

थिलामाले ब्रिज के नाम से पहचाने जाने वाले इस प्रोजेक्ट की लंबाई करीब 6.74 किलोमीटर है। इसके जरिए राजधानी माले को विलीमाले, गुल्हीफालहू और थिलाफुशी से जोड़ा जाना है। परियोजना में समुद्री पुल, वायाडक्ट और सड़क निर्माण समेत कई महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।

भारत इस परियोजना के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर का वित्तीय पैकेज उपलब्ध करा रहा है। इसमें भारतीय एक्जिम बैंक की 40 करोड़ डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट और भारत सरकार की 10 करोड़ डॉलर की अनुदान सहायता शामिल है। परियोजना का निर्माण भारतीय कंपनी एफकॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर कर रही है।

75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा

अगस्त 2026 तक परियोजना का 75 प्रतिशत से अधिक काम पूरा होने की जानकारी सामने आई है। माले-विलीमाले खंड का मुख्य ऊपरी ढांचा तैयार हो चुका है, हालांकि फिनिशिंग और परियोजना के अन्य हिस्सों का काम अभी जारी है।

मालदीव के पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने परियोजना के इस महत्वपूर्ण पड़ाव का स्वागत करते हुए इसे भारत-मालदीव संबंधों और साझा विकास का प्रतीक बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।

कनेक्टिविटी से बदलेगा मालदीव का आर्थिक भूगोल

GMCP को केवल पुल निर्माण की परियोजना नहीं, बल्कि मालदीव की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। द्वीपों के बीच बेहतर संपर्क से लोगों की आवाजाही, व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स को गति मिलने की उम्मीद है।

भारत के लिए भी यह परियोजना ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और विकास साझेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत मालदीव में बुनियादी ढांचे, आवास, सामुदायिक विकास और क्षमता निर्माण समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है।

हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक महत्व

मालदीव की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास दोनों देशों के आपसी संबंधों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

GMCP के आगे बढ़ने के साथ भारत-मालदीव की विकास साझेदारी अब घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीन पर दिखाई देने वाले बुनियादी ढांचे में बदलती नजर आ रही है।

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