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साइबर ठगी पर उत्तराखंड STF की बड़ी कार्रवाई, 21.85 करोड़ रुपये बचाए

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1930 हेल्पलाइन बनी साइबर पीड़ितों के लिए मददगार, 200 से 250 मामलों में रकम कराई गई होल्ड; डिजिटल अरेस्ट और निवेश ठगी के मामलों में भी त्वरित कार्रवाई

देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की 1930 साइबर हेल्पलाइन पीड़ितों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है। वर्ष 2026 में 12 अगस्त तक साइबर ठगी की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए STF ने 21.85 करोड़ रुपये की धनराशि बचाने में सफलता हासिल की है। पुलिस के अनुसार इस अवधि में करीब 200 से 250 पीड़ितों की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम को संबंधित बैंक खातों में होल्ड कराया गया।

शिकायत मिलते ही शुरू होती है कार्रवाई

साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही STF की टीम संबंधित बैंकों, नोडल अधिकारियों और अन्य एजेंसियों से समन्वय कर ठगी की रकम को रोकने का प्रयास करती है। अगस्त में भी कई मामलों में पीड़ितों की रकम का बड़ा हिस्सा समय रहते होल्ड कराया गया।

चमोली के नंदप्रयाग निवासी एक व्यक्ति से तीन अगस्त को 60 हजार रुपये की ठगी हुई। शिकायत मिलने के बाद पूरी रकम होल्ड करा दी गई। हरिद्वार के बुग्गावाला निवासी व्यक्ति के साथ हुई करीब 1.30 लाख रुपये की ठगी में 91 हजार रुपये से अधिक की रकम होल्ड कराई गई।

नैनीताल के रामनगर निवासी व्यक्ति से हुई करीब 3.66 लाख रुपये की साइबर ठगी में पूरी रकम होल्ड कराने में सफलता मिली। देहरादून कैंट और हरिद्वार में सामने आए अन्य मामलों में भी शिकायत मिलते ही कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम को सुरक्षित कराने का प्रयास किया गया।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 21 लाख की ठगी

साइबर अपराधियों द्वारा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही ठगी को लेकर भी STF लगातार लोगों को जागरूक कर रही है। देहरादून के रायपुर क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति से डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर करीब 21 लाख रुपये की ठगी की गई। सात अगस्त को शिकायत मिलने के बाद 1930 टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 16.36 लाख रुपये से अधिक की रकम होल्ड करा दी।

इसी तरह नेहरू कॉलोनी निवासी व्यक्ति के साथ चार लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी के मामले में दो लाख रुपये से अधिक की रकम होल्ड कराई गई। पौड़ी गढ़वाल में भी ठगी की लगभग पूरी रकम को समय रहते रोकने में सफलता मिली।

निवेश के नाम पर भी बना रहे शिकार

साइबर ठग शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश में कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर भी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। अल्मोड़ा में सामने आए एक मामले में स्टॉक मार्केट निवेश के नाम पर साइबर ठगी की शिकायत मिली। STF की साइबर हेल्पलाइन टीम ने संबंधित नोडल अधिकारियों और I4C के माध्यम से कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा होल्ड कराया।

पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश के फर्जी लिंक भेजकर लोगों को फर्जी ट्रेडिंग एप या वेबसाइट से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद रकम जमा कराने के नाम पर ठगी की जाती है।

STF ने लोगों को किया सावधान

SSP STF अजय सिंह ने लोगों से साइबर अपराधों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड की जानकारी, OTP, PIN या UPI PIN साझा नहीं करना चाहिए। बैंक खाता किराये या कमीशन पर देना भी अपराध है। खाते में किसी अज्ञात स्रोत से रकम आने पर तत्काल बैंक और पुलिस को सूचना देने की सलाह दी गई है।

पुलिस ने लोगों को अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल से सावधान रहने और किसी भी व्यक्ति के साथ निजी दस्तावेज अथवा व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करने को कहा है।

ऑनलाइन गिरफ्तारी का दावा हो तो रहें सतर्क

STF के अनुसार साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI या ED का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उन्हें कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की धमकी देते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी ऑनलाइन तरीके से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती।

इसके अलावा फर्जी वेबसाइट, निवेश में असामान्य मुनाफे का लालच और इंटरनेट पर मिले फर्जी कस्टमर केयर नंबरों से भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।

ठगी होते ही तुरंत करें शिकायत

STF ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर घबराने या देर करने के बजाय तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर रकम को होल्ड कराने और वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत ऑनलाइन माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है।

पुलिस का संदेश साफ है—साइबर ठगी में हर मिनट महत्वपूर्ण है। समय पर शिकायत ही ठगी की रकम को बचाने में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है।

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