उत्तराखंड के बाद अब दिल्ली में विरोध कार्यक्रम से जंग हुई तेज
तो भाजपा का फार्मूला रस घोलेगा उत्तराखंड के’ दूषित’ माहौल में
बिगड़े बोल ने बजट, भू कानून,यूसीसी समेत अन्य फैसलों की चमक फीकी की
देहरादून। भाजपा मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल के बिगड़े बोल के बाद राजनीतिक व सामाजिक गलियारों में बुरी तरह रायता फैल गया है। इस लफड़े ने सरकार के नये बजट,भू कानून, यूसीसी समेत अन्य खास फैसलों को पार्श्व में धकेल दिया है।
बजट सत्र से शुरू हुआ हंगामा प्रदेश की सरहद से निकल कर दिल्ली व अन्य इलाकों में छितर गया है। दिल्ली में प्रवासी उत्तराखंडी दो मार्च को मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल के विरोध में उतरेंगे। जबकि उत्तराखंड में कांग्रेस, उक्रांद, बेरोजगार संघ ने अलग-अलग विरोध कार्यक्रम तय किये है।
इस बीच, 1 मार्च को दून में सद्भावना मार्च निकालने की भी खबर सामने आई है। कुल मिलाकर प्रेम विरोधी व प्रेम समर्थक अपने अपने स्टैंड पर खड़े हैं।
विधानसभा के पटल से उठे इस गुबार ने स्पीकर ऋतु खंडूड़ी, मंत्री सुबोध उनियाल और प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट को भी अपने लपेटे में ले लिया है।
ऋतु खंडूड़ी के कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला को सदन में जोरदार तरीके से टोकने के बाद विरोध और भी बढ़ गया। लखपत बुटोला लगातार पहाड़ के हितों की बात करते हुए टारगेट कर रहे हैं।
मंत्री सुबोध उनियाल का निगम चुनाव के समय बोली गयी बात अब तेजी से घर घर पहुंचाई जा रही है। जिसमें सुबोध उनियाल ने पहाड़ियों के बाहर से आने की बात कही थी। यही नहीं, ऋषिकेश नगर निगम में भाजपा उम्मीदवार शम्भू पासवान के पक्ष में दलील देते हुए हेमवती नन्दन बहुगुणा, एन डी तिवारी आदि पहाड़ी नेताओं के यूपी व अन्य प्रदेशों में कई गई राजनीति का उदाहरण पेश किया। शम्भू पासवान और पहाड़ के इन दिग्गजों के बीच राजनीतिक साम्यता स्थापित करने की इस कोशिश को भी अब निशाना साधते हुए बेमेल बताया जा रहा है।
इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के मंत्री प्रेम को नसीहत देने के साथ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहने से आग और भड़क गई। भट्ट के बयान के बाद किसी रिसॉर्ट व होटल में हिस्सेदारी की कहानी भी घर घर पहुंचाई जा रही है।
बहरहाल, मंत्री प्रेम कर बिगड़े बोल के बाद पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत और विधायक चमोली ने मुखरता से विरोध किया। और कहा कि मंत्री प्रेम को धैर्य से काम लेना चाहिए था।
विधायक चमोली ने स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी का बचाव करने की कोशिश की। उन्हें पहाड़ की बेटी करार दिया। पूर्व सीएम जनरल खंडूड़ी के योगदान को याद किया। इस बीच, हाल ही में गैरसैंण पहुंची स्पीकर ऋतु खण्डूड़ी को कांग्रेस ने काले झंडे दिखा कर विरोध किया। बढ़ते विरोध के बाद नम्र नजर आ रही स्पीकर को भी यह कहना पड़ गया कि वो फौजी और पहाड़ की बेटी है। लेकिन इससे भी बात नहीं बन पा रही है।
स्पीकर के स्टाफ में तैनात कार्मिकों की एक सूची नये सिरे से वायरल कर दी गयी। जिसमें अधिकतर लोग अन्य प्रदेशों के हैं। हालांकि, यह भी बात सामने आई है कि इनमें से अधिकतर बाहरी लोग हटा दिए गए हैं। स्पीकर बनने के साथ ही स्टाफ में बाहरी लोगों की नियुक्ति करने के मुद्दे पर भी स्पीकर पर राजनीतिक आक्रमण जारी है।
सीएम धामी-कोशिश जारी
इधर, मंत्री प्रेम के बिगड़े बोल के बाद सीएम धामी ने निजी हस्तक्षेप कर खेद प्रकट करवा दिया था। सीएम ने हम सभी उत्तराखंडी कहकर ज्वाला पर पानी डालने की कोशिश की है। इस जंग की वजह से धामी सरकार के नये बजट, भू कानून, यूसीसी समेत अन्य निर्णयों के नियोजित प्रचार प्रसार की रणनीति को भी गहरा धक्का लगा है। सरकार अपनी उपलब्धियों का राग गाने के बजाय इस संकट का हल निकालने में जुटी हुई है।
लेकिन ऋषिकेश नगर निगम चुनाव से पड़ी खाई सदन में मंत्री प्रेमचन्द के बिगड़े बोल के बाद और भी चौड़ी हो गयी है। भाजपा के लिए यह एक नया राजनीतिक संकट माना जा रहा है।
उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन की कहानी की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है। धामी कैबिनेट से मंत्री प्रेमचन्द को हटाए जाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है।
इस आसन्न संकट की पूरी खबर भाजपा हाईकमान के कानों तक है। भाजपा की ओर से ऐसे राजनीतिक व सामाजिक फार्मूले पर सभी की निगाहें टिकी हैं जो प्रदेश के माहौल में जहर के बजाय रस घोल दे…