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आईआईटी दिल्ली दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी का संदेश: ‘जो सीखेगा, वही जीतेगा’, युवाओं से विकसित भारत के निर्माण में जुटने का आह्वान

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NEW DELHI, INDIA - JULY 20: Prime Minister Narendra Modi addresses the media at the Hans Dwar entrance outside Parliament House on the opening day of Parliament's Monsoon Session on July 20, 2026 in New Delhi, India. (Photo by Ajay Aggarwal/Hindustan Times via Getty Images)

पीएम बोले- आने वाले 30-35 वर्षों में युवाओं के फैसले तय करेंगे विकसित भारत की दिशा, ‘चिप से लेकर शिप तक’ देश में निर्माण का लक्ष्य

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं से निरंतर सीखते रहने, नई तकनीकों को अपनाने और वैश्विक चुनौतियों के समाधान खोजने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में तकनीक भारत की सबसे बड़ी ताकत बन रही है और आने वाले 30-35 वर्षों में युवाओं के फैसले देश के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

प्रधानमंत्री ने डिग्री और मेडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आईआईटी दिल्ली से निकलने वाले युवा केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे, बल्कि देश की जटिल समस्याओं के समाधान की क्षमता और संकल्प भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में आने वाली कठिनाइयों से घबराने के बजाय समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान खोजने की सलाह दी।

कोविड के बाद छात्रों के बीच पहुंचे पीएम

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली बार जब वह आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह से जुड़े थे, तब देश कोविड महामारी के दौर से गुजर रहा था और कार्यक्रम में उनकी भागीदारी वर्चुअल माध्यम से हुई थी। इस बार विद्यार्थियों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विशेष खुशी हो रही है।

उन्होंने छात्रों से कैंपस और हॉस्टल जीवन की यादों को संजोकर रखने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक, प्रोफेसर, मेंटर और संस्थान का सहयोगी स्टाफ विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है। इन रिश्तों को कैंपस के साथ पीछे छोड़ने के बजाय जीवन की पूंजी के रूप में साथ लेकर चलना चाहिए।

‘जो सीखेगा, वही जीतेगा’

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में तकनीक, उद्योग और रोजगार की दुनिया तेजी से बदलेगी। ऐसे में भविष्य की चुनौतियों का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। उन्होंने विद्यार्थियों को लगातार सीखने की आदत विकसित करने का संदेश देते हुए कहा कि “जो सीखेगा, वो जीतेगा।”

उन्होंने कहा कि आईआईटी की डिग्री केवल अच्छे सीजीपीए या प्लेसमेंट का प्रमाण नहीं है, बल्कि कठिन समस्याओं को समझकर उनके समाधान खोजने की क्षमता का प्रमाण है।

जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’

प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉलेज और वास्तविक जीवन की परीक्षाओं में बड़ा अंतर है। संस्थान में परीक्षा का सिलेबस निर्धारित होता है, लेकिन जिंदगी की परीक्षा में बहुत कुछ ‘आउट ऑफ सिलेबस’ होता है। ऐसे में युवाओं को जिज्ञासु बने रहना चाहिए और उन समस्याओं पर सवाल उठाने चाहिए जिन्हें समाज लंबे समय से सामान्य मानकर स्वीकार करता आया है।

उन्होंने कहा कि बड़ी समस्या सामने आने पर घबराने के बजाय उसे छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान तलाशना चाहिए। कई बार कठिनाइयां अपने साथ नए अवसर भी लेकर आती हैं।

‘चिप से लेकर शिप तक’ देश में निर्माण का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज आर्थिक, तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्पेस सेक्टर, सेमीकंडक्टर और ड्रोन जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में “चिप से लेकर शिप तक” देश में निर्माण की क्षमता विकसित की जाएगी। ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल खेती, दवाओं की डिलीवरी और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ रहा है और युवा इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

AI और क्वांटम जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं

प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, महत्वपूर्ण खनिज, डीप सी एक्सप्लोरेशन, बैटरी और ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तथा क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए युवाओं से इन क्षेत्रों में नवाचार और शोध को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में प्रतिभा, अनुसंधान और नेतृत्व की आवश्यकता है और आईआईटी जैसे संस्थानों से निकलने वाले युवा भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को नई और उपयोगी रिसर्च की जरूरत है। सरकार शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप, रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसी पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने विद्यार्थियों से सोशल मीडिया पर दूसरों से अपनी तुलना नहीं करने की भी अपील की। पीएम ने कहा कि दीक्षांत के बाद विद्यार्थियों के बीच पैकेज, कंपनी या स्टार्टअप को लेकर तुलना की प्रवृत्ति हो सकती है, लेकिन जिंदगी कोई लीडरबोर्ड नहीं है। वास्तविक प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, बल्कि स्वयं से होनी चाहिए।

हर फैसले में देशहित को रखें प्राथमिकता

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 30-35 वर्षों में युवाओं के निर्णय विकसित भारत की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। इसलिए उन्हें अपने प्रत्येक निर्णय में यह विचार करना चाहिए कि उससे देश को क्या लाभ मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने सभी विद्यार्थियों, उनके माता-पिता, परिवारों, शिक्षकों और आईआईटी दिल्ली की पूरी टीम को दीक्षांत समारोह की बधाई देते हुए युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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