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बस दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच होने के साथ ही दोषियों को मिले सजा

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ऋषिकेश। जिलाध्यक्ष जयेन्द्र रमोला ने जारी एक बयान में कहा की पौड़ी जिले में धूमाकोट के समीप हुई बस दुर्घटना पर कांग्रेस परिवार गहरा दुख व संवेदनायें व्यक्त करते है और भगवान से मृतकों की आत्मा को शांति की प्रार्थना करते हैं साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
जयेन्द्र रमोला ने कहा कि इस दुर्घटना की उच्चस्तरीय जॉंच होनी चाहिये और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए परन्तु पहली नजर में दुर्घटना का मुख्य कारण ओवरलोडिंग व खराब सड़क होना पाया गया है। सुप्रीम कोर्ट व्दारा आदेशित किया गया है की ओवरलोड रोका जाना चाहिए परंतु अधिकतर जिलों में पुलिस प्रशासन व आरटीओ ओवरलोडिंग को रोकने में नाकाम हुए हैं तथा साथ ही कई क्षेत्रों में प्रशासन के लोग ओवरलोडिंग को बढ़ावा देते हुए नजर आए हैं इसमें सरकार की भी बहुत बड़ी नाकामी है कि वह ओवरलोड को रोक नहीं पा रही है। साथ ही पहाड़ को सुविधाओं से सम्पन्न करने की बात करने वाली व ऑल वेदर रोड के नाम पर ढिंढोरा पीटने वाली केंद्र व प्रदेश की सरकार फेल होती नजर आ रही है कई क्षेत्रों में मुख्य मार्गों पर बड़े बड़े गड्ढे होने की वजह से दुर्घटनाए लगातार हो रही है परन्तु सरकार जॉंच के अतिरिक्त कुछ नहीं कर पाती आज तक कोई भी जॉंच ना पूरी हुई है नाही किसी दोषी व्यक्ति को सजा मिली है बस सरकार जॉच और मुआवजा तक सीमित है, और क्योंकि ओवरलोडिंग के साथ-साथ सड़क टूटी होनी भी दुर्घटना की वजह बताई जा रही है इसलिये कल की दुर्घटना के मुख्य दोषी जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन व मार्ग एजेंसी हुये और कांग्रेस मॉंग करती है कि इन तीनों विभागों के जिम्मेदार अधिकारी के विरूद मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही करनी चाहिये ताकि भविष्य में यह अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से कार्य करे और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने सोशलमीडिया पर अपनी एक खास इच्छा जाहिर की है। हरीश रावत अपने स्कूल के दिनों में वापस लौटना चाहते हैं। इस इच्छा को वह बच्चों को पढ़ाकर पूरा करना चाहते है। अपने ट्वीटर अकाउंट पर पोस्ट एक वीडियो में उन्होंने यह इच्छा जाहिर की है। दरअसल, हरीश रावत को रुद्रप्राग के जिलाधिकारी विधायक मंगेश घिल्डियाल और उनकी पत्नी से यह प्ररेणा मिली है। हरीश रावत का कहना है कि वह अपने उस स्कूल में बच्चों को पढ़ाने चाहते हैं। जहां से उन्होंने शिक्षा-दीक्षा ग्रहण की है। उनका कहना है कि वह नौंवी क्लास के बच्चों को पढ़ाकर देखना चाहते है कि वह एक शिक्षक के रूप में कितने सफल हैं।
हरीश रावत ने ट्विटर पर लिखा कि मेरी दिली इच्छा है कि जिन विद्यालयों में मैंने पढ़ा है, और जहां मैं परीक्षा देने गया, वहां कक्षा 9 के बच्चों को मैं कुछ पढ़ा सकूं। देखें, शिक्षक के रूप में कैसा लगता हूं। मैंने यह प्रेरणा डीएम रुद्रप्रयाग और उनकी पत्नी से ली है। वो लोग भी स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाते हैं।
बता दें कि इनदिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत देहरादून में है और अपनी इस चाहत को पूरा करने के लिए वह जल्द ही अपने गृह जनपद अल्मोड़ा का रुख करेंगे। एक शिक्षक बनने की चाहत उनके मन में रुद्रप्रयाग के डीएम और उनकी पत्नी को देखकर जागी है। हरीश रावत ने सोशलमीडिया में शेयर किए इस वीडियो में उन्हें ही अपना प्ररेणास्रोत बताया है। हरीश रावत में इस वीडियो के माध्यम से लोगों से अपील की है कि अपने-अपने क्षेत्रों में वह बाहर निकल कर आए और उन बच्चों को शिक्षा दीक्षा में सहायता करें, जो इस काबिल है। उधर, मंगेश घिल्डियाल का कहना है कि उन्हें बेहद खुशी है कि समाज में उनकी पहल का प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहन है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तरह समाज के अन्य लोग भी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर काम करना चाहिए। इससे बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को निखरने का मौका मिलेगा और देश-दुनिया में वह उत्तराखंड का नाम रोशन करेंगे।

जोशीमठ। पर्यटकों के लिए धरती का स्वर्ग तो वैज्ञानिकों के लिए शोध का केंन्द्र है फूलों की घाटी। एक माह में डेढ हजार से अधिक पर्यटक पंहुचे वैली मे। अब 15 जुलाई से 15 सितबंर तक विदेशी शैलानियों व शोधार्थियों का जमावडा रहेगा घाटी मे।
विश्व धरोहर फूलो की घाटी अब धीरे-धीरे अपने यौवन की ओर लौट रही है। पाॅच सौ खूबसूरत पुष्पो की प्रजातियों की इस घाटी मे इन दिनो डेढ सौ किस्म के पुष्प खिले है। और अब 15जुलाई से 15 सितंबर के मध्य घाटी अपने पूरे यौवन पर रहेगी।
वर्ष 1982 मे फूलो की घाटी को राष्ट्रीय पार्क घोषित होने के बाद तथा वर्ष 2005 मे विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद से इस घाटी मे लगातार प्रकृति प्रेमी देशीध्विदेशी पर्यटको की आमद बढती ही जा रही है। आपदा वर्ष 2013-14 को यदि छोड दिया जाय तो घाटी मे प्रतिवर्ष हजारो पर्यटक पंहुच रहे है। विदेशी पर्यटको की संख्या मे प्रतिवर्ष आशातीत बृद्धि हो रही है।
इस वर्ष एक जून को घाटी पर्यटको के लिए खोली गई और एक माह के इस अंतराल मे घाटी मे 1562भारतीय पर्यटक तो 44विदेशी पर्यटक सैर करने के लिए पंहुचे। और इनसे फीस के रूप मे वन महकमे को अच्छा राजस्व भी प्राप्त हुआ।
विश्व धरोहर फूलो की घाटी मे इन दिनो जेरेनियम, पोंटेटिला, एनीमून, हिमालयन सिल्वर ओरचिट, ब्लूपापी, थाइमस, कोबरालिली , हेरक्यूलियम, वाइल्ड रोज, आइटिस व वन ककडी सहित करीब डेढ सौ किस्म के फूल खिले है। फूलो की घाटी न केवल प्रकृति प्रेमी पर्यटको के लिए ब्लकि वनस्पति विज्ञान मे शोध करने वाले छात्रो व वैज्ञानिको के लिए भी शोध का केंद्र वन गया है। घाटी मे प्रतिवर्ष हजारो की संख्या मे देशी-विदेशी पर्यटको के साथ ही विश्व भर से वनस्पतिविज्ञान मे शोध करने वाले छात्र घाटी मे पंहुच रहे है। प्रकृति प्रेमी पर्यटको के आवागमन से गोविंदघाट से घांघरियाॅ तक के ब्यवसायियों को भी अच्छा लाभ हो रहा है। गत वर्ष जब हेमकुंड साहिब पंहुचने वाले यात्रियो की संख्या कम रही तो फूलो की घाटी पंहुचे पर्यटको से भ्यॅूडार वैली के निवासियों को ब्यवसाय चला। वर्ष 2013 की आपदा से उबारने मे फूलो की घाटी भी मददगार साबित हुई। घाॅधरियॅा के होटल ब्यवसायी दिनेश झिक्वंाण कहते है कि गत वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा मे कमी रही और होटल तथा रेस्टोरेंट ब्यवसासियों ने 2013 से पूर्व की यात्रा को देखते हुए अक्टूबर महीने तक की सामग्री अपने प्रतिष्ठानो मे पंहुचा दी थी। लेकिन अचानक जुलाई से सितबंर तक फूलो की घाटी पंहुचने वाले पर्यटको मे कई गुना बृद्धि हुई और ब्यवसासियों की ब्यवसाय मे ठीक चला।
प्रकृति की अनमोल धरोहर फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क भी बनी और विश्व धरोहर का दर्जा भी हासिल किया। लेकिन करीब 87वर्ग किमी0 मे फैली इस घाटी मे आज तक ने तो एक अदद रैन सेल्टर है और ना ही शौचालय। घाटी पंहुचने वाले पर्यटक भी कई बार इसकी शिकायत कर चुके है। खासकर स्वच्छ भारत अभियान सचालित होने के बाद से पर्यटक घाटी मे शौचालय की मांग कर रहे है। फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क के रैंज आफीसर बृजमोहन भारती के अनुसार घाटी मे रैन सेल्टर निर्माण व शौचालयो के निमार्ण के लिए जिला धिकारी के माध्यम से पर्यटन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। वजट आंवटन होते हुए विभाग स्वयं ही रैन सेल्टर व शौचालयो का निर्माण कराऐगा।

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